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इंदौर

शेरनी मेघा और बिजली ने दिलाई इंदौर चिड़ियाघर को देश में पहचान

इंदौर। टाइगर स्टेट कहलाने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के चिड़ियाघर का नाम शेरों के लिए भी सम्मान से लिया जाता है। यह सम्मान दिलाने का श्रेय शेरनी मेघा और बिजली को दिया जाता है। पिछले दस साल में यहां जन्मे 20 शेर देश के अन्य राज्यों के चिड़ियाघरों में दहाड़ रहे हैं।

इनके बदले में मिले ब्लेक-सफेद बाघ के बाद कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय तीन रंगों के बाघों के देश में ख्यात हुआ। साथ ही एनिमल एक्सचेंज प्रोग्राम के बदले 20 विभिन्न दुर्लभ प्रजाति के वन्य प्राणी मिले।

यहां ब्रीडिंग अच्छी होने से आने वाले समय में यह संख्या और बढ़ने वाली है। दर्शक यहां शेरों को देखने के लिए खासतौर पर आते हैं। गहरे भूरे बालों से घिरी गर्दन के बीच नजर आता रुआबदार चेहरा यह दर्शाने के लिए पर्याप्त होता है कि शेर जंगल का निर्विवाद राजा है। भले ही हमें बब्बर शेरों के मामले में इंदौर देश में शेरों की ब्रीडिंग के मामले में सबसे अव्वल है। यहां पैदा हुए शेर देशभर में दहाड़ रहे हैं और अपना कुनबा आगे बढ़ा रहे हैं।

शाम को दहाड़ते हैं शेर

कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव बताते हैं कि वर्तमान में हमारे पास नौ मादा एवं चार नर शेर हैं। सभी शेर व्यस्क हैं। इनकी चहल कदमी खास आकर्षण का केंद्र बनती है। शेर 16 घंटे आराम पसंद करते हैं। सोकर उठने के बाद शाम चार-पांच बजे के आसपास दहाड़ते हैं तो इनकी आवाज तीन किलोमीटर के हिस्से में सुनाई देती है। इसके चलते अन्य चिड़ियाघर भी शेरों के लिए इंदौर जू ही उनकी पहली प्राथमिकता रहती है।

प्राकृतिक वातावरण मिलने से बढ़ा कुनबा

जू क्यूरेटर एंड एजुकेशन आफिसर निहार परुलेकर बताते हैं कि इंदौर में शेरों को पिंजरे में नहीं रखा जाता बल्कि प्राकृतिक वातावरण में रखा जाता है। यहां शेरों के लिए खुले बाड़े बनाए गए हैं, जिनमें इन्हें जंगल की तरह का माहौल मिलता है। दौड़ने के लिए मैदान हैं तो पानी में अटखेलियां करने के लिए छोटा तालाब भी है।

प्राकृतिक वातावरण में रहने से शेरों का मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है। इस कारण यहां शेरों का कुनबा बहुत तेजी से आगे बढ़ा है। यहां से शेरों को छतबीर (पंजाब), नंदन कानन (ओडिशा), जामनगर (गुजरात), भिवानी (हरियाणा) और गदग चिड़ियाघर (कर्नाटक) और पुणे (महाराष्ट्र) भेजा गया है।

सबसे पहले वर्ष 2014 में आया आकाश एवं मेघा का जोड़ा

इंदौर के चिड़ियाघर में सबसे पहले वर्ष 2014 में शेरों का जोड़ा आया था। इन्हें आकाश और मेघा नाम दिया गया। इनके आने के बाद लगातार शेरों की संख्या बढ़ती गई जबकि कई शेरों को अन्य चिड़ियाघरों को दिया गया। वर्तमान में शेरों की संख्या 13 है। यह दोनों एशियाई शेर हैं। इसके बाद इन्हीं के वंशज चिड़ियाघर में बढ़ते चले गए। आकाश और मेघा की आयु अब करीब 16-17 साल है और दोनों स्वस्थ्य हैं।

आज जनजागरण कार्यक्रम

लायन डे पर चिड़ियाघर में सुबह 11 बजे से कई कार्यक्रम होंगे। इसमें शेरों पर चित्रकला प्रतियोगिता होगी। इसके बाद होने वाले संवाद कार्यक्रम में शेरों की पसंद-नापसंद, खान-पान, उम्र, रखरखाव के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही उनके पसंदीदा प्राकृतिक वातावरण के बारे में भी बताया जाएगा।

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